महाराष्ट्रः आंदोलित किसानों को CM फडणवीस ने दिया भरोसा, मांगों को लेकर पाॅजिटिव कदम उठायेगी सरकार

महाराष्ट्रः आंदोलित किसानों को CM फडणवीस ने दिया भरोसा, मांगों को लेकर पाॅजिटिव कदम उठायेगी सरकार
Publish Date:12 March 2018 07:14 PM

मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को आंदोलित किसानों को भरोसा देते हुए कहा कि उनकी सरकार उन किसानों और आदिवासियों की मांग के प्रति संवेदनशील और सकारात्मक है, जो प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की तरफ खींचने के लिए नासिक से मुंबई चलकर आये हैं. विधानसभा में एक चर्चा के दौरान फडणवीस ने यह प्रतिक्रिया दी. यह चर्चा विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल द्वारा शुरू की गयी, जिन्होंने इस लंबी यात्रा में शामिल होने के लिए किसानों की प्रशंसा की. ये किसान इस शांतिपूर्ण विरोध यात्रा के जरिये पूर्ण ऋण माफी और फसलों पर गुलाबी कीट के हमले और ओलावृष्टि से तबाह हुई फसल के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं.दक्षिण मुंबई का आजाद मैदान सोमवार की सुबह लाल सागर में तब्दील हो गया, जब हजारों किसान पिछले छह दिनों से पड़ोसी जिले नासिक से करीब 180 किलोमीटर की दूरी तय कर लाल झंडे अपने हाथों में लेकर यहां एकत्रित हुए. किसनों ने बिना किसी शर्त के ऋण माफी और वन्य जमीन को जनजातीय किसानों को हस्तांतरित करने की मांगों को लेकर विधानसभा परिसर को घेरने की भी योजना बनायी है.विखे पाटिल ने सदन में कहा कि विरोध कर रहे किसान जे सोमैय्या मैदान से सोमवार सुबह आजाद मैदान पहुंच गये, ताकि बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे बच्चों को ट्रैफिक जाम का सामना न करना पड़े. मुंबई के लोग भी उनका ध्यान रख रहे हैं. उन्होंने विरोध कर रहे किसानों के नेता के साथ उनकी मांगों को लेकर मंत्रालयी समिति की जरूरत पर सवाल भी उठाया. चर्चा में फडणवीस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांग बहुत महत्त्वपूर्ण हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 90 से 95 फीसदी प्रतिभागी गरीब आदिवासी हैं. वह वन्य भूमि अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. उनके पास जमीन नहीं है और वह खेती नहीं कर सकते. सरकार उनकी मांगों के प्रति संवेदनशील और सकारात्मक है. 
इससे पहले, किसानों की कर्जमाफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने और स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र के किसानों का एक बड़ा जत्था सोमवार को मुंबई में विधानसभा का घेराव करने के लिए पहुंच चुका है. विधानसभा का घेराव करने से पहले सोमैया मैदान में एकत्र किसानों का कहना है कि फडनवीस सरकार ने पिछले साल किये गये 34000 करोड़ रुपये की कर्जमाफी के वादे को अभी तक पूरा नहीं किया है. इस बीच, सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में चल रहा किसानों का आंदोलन सिर्फ राज्यभर का नहीं, बल्कि ये पूरे देश का है. देशभर का किसान समस्या से जूझ रहा है. किसानों की ओर से कर्जमाफी समेत अन्य मांगों को लेकर उठाये गये इस कदम से महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल आ गया है. किसानों के मुंबई पहुंचते ही कई राजनीतिक पार्टियों ने उनकी इस पदयात्रा का समर्थन भी किया है. सत्ता में बैठी शिवसेना की ओर से आदित्य ठाकरे और एकनाथ शिंदे ने किसानों को संबोधित किया. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के किसान मोर्चे अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) की अगुवाई में यह विरोध मार्च मंगलवार को नासिक से मुंबई के लिए रवाना हुआ था. हाथों में लाल झंडा थामे ये किसान ऑल इंडिया किसान सभा समेत तमाम संगठनों से जुड़े हैं. इस मार्च में किसानों के साथ खेतिहर मजदूर और कई आदिवासी शामिल हैं. किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने भी अपनी तरफ से कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन को किसानों से बातचीत करने भेजा, जिन्होंने किसानों को अश्वासन दिया कि सरकार उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक है.  महाजन ने कहा कि सोमवार को मुख्यमंत्री के साथ इनकी चर्चा होने वाली है. इनके जो सभी कार्यकारणी सदस्य हैं या फिर प्रमुख हैं, वे मुख्यमंत्री के साथ वार्ता करेंगे. मुझे लगता है इस वार्ता से कुछ सकारात्मक चीजें निकलकर सामने आयेंगी. सरकार ने किसानों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक कर किसानों के मांगों पर चर्चा की और लगभग हर मांग को मानने की बात भी कही, लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि सरकार किसानों से बात कर अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रही है. ऑल इंडिया किसान सभा के सदस्घ्य डॉ आर रामकुमार ने कहा कि सरकार ने यह स्वीकार कर लिया है कि उनकी नीतियां गलत हैं, जिसकी वजह से किसान संकट में हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग किसानों के इस विरोध-प्रदर्शन को अपना समर्थन देकर अपनी वाहवाही लूटना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि राजनीति के इस खेल को वह भली-भांति समझ रहे हैं. मुंबई के सायन स्थित सोमैया में रुके इन किसानों और इनके संगठन के नेताओं से भाजपा को छोड़कर सूबे के तमाम राजनीतिक दलों के लोगों ने संपर्क स्थापित कर समर्थन देने का भरोसा दिया है. अब देखना यह है कि सोमवार के किसानों के इस प्रदर्शन में तथाकथित तौर पर किसानों को समर्थन देने वाले राजनीतिक दलों का रवैया क्या रहता है.
 

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