पिछले 4 सालों 9 सीटें गंवा चुकी भाजपा, संसद में बढ़ी चुनौतियां

 पिछले 4 सालों 9 सीटें गंवा चुकी भाजपा, संसद में बढ़ी चुनौतियां
Publish Date:16 March 2018 11:55 AM

नई दिल्ली: पिछले आम चुनाव के बाद से रिक्त हुई लोकसभा सीटों के उपचुनावों में लगातार हार के चलते संसद में भाजपा की चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। मई 2014 में 282 सीटें जीतकर सत्ता में आई भाजपा पिछले चार सालों नौं सीटें गंवा चुकी है। वर्तमान में उसके पास 273 सांसद हैं जो सदन में पचास फीसदी से सिर्फ एक सीट अधिक है। भाजपा को दो सीटों का झटका तो बुधवार को ही लगा। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और फूलपुर में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद के इस्तीफा से रिक्त हुई सीटें उपचुनाव में भाजपा के हाथ निकल गई। उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली जीत ने 2019 में होने वाले आम चुनाव के लिए भाजपा खिलाफ एक माहौल खड़ा कर सकती है। गौरतलब है कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर जोरों पर थी। 
रतलाम सीट भाजपा ने कांग्रेस के हाथों गंवा दी
2014 में हुए बीड और नरेंद्र मोदी की सीट वडोदरा में बीजेपी ने करीब 7 लाख और 3 लाख वोटों से उपचुनाव जीता था। तब माना जा रहा था कि मोदी लहर अभी बाकी है। लेकिन, 2015 में इस लहर को झटका लगा। मध्य प्रदेश की रतलाम सीट भाजपा ने कांग्रेस के हाथों गंवा दी। साल 2017 और 2018 में हुए 5 लोकसभा उपचुनावों में यह लहर और हल्की पड़ गई। नतीजन भाजपा ने गुरदासपुर, अलवर, अजमेर के साथ-साथ फूलपुर और गोरखपुर सीटें भी गंवा दीं। वहीं गुजरात चुनाव से ठीक पहले भाजपा सांसद नानाभाऊ पटेल ने गोंदिया-भंडारा लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। पटोले ने किसानों के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए पार्टी को छोड़ दिया था और कांग्रेस में शामिल हो गए थे। खास बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2014 से अब तक अपनी 9 सीटें गवां दी हैं। 
भाजपा के लिए डगर होगी कठिन  
बता दें कि भाजपा को गोंडिया (महाराष्ट्र) इस्तीफा, पार्टी से नाराजगी। फूलपुर (यूपी) उपचुनाव में हार, गोरखपुर (यूपी) उपचुनाव में हार, अजमेर (राजस्थान) उपचुनाव में हार, अलवर (राजस्थान) उपचुनाव में हार, गुरदासपुर (पंजाब) उपचुनाव में हार, रतलाम (मध्यप्रदेश) उपचुनाव में हार, कैराना (उत्तर प्रदेश) सांसद का निधन, पालघर (महाराष्ट्र) सांसद का निधन। खास बात यह है कि मोदी लहर का यही सिलसिला अगर अगले वर्ष होने जा रहे लोकसभा चुनावों में जारी रहा तो भाजपा के लिए डगर कठिन होगाी। संख्या बल ज्यादा कम होने की स्थिति में एनडीए के घटक दल भाजपा पर दबाव बना देंगे, जो अभी पूरी तरह से नहीं कर पा रहे हैं।
 

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