न्यायिक फैसलों के खिलाफ बोलना संवैधानिक अधिकार: नवाज

न्यायिक फैसलों के खिलाफ बोलना संवैधानिक अधिकार: नवाज
Publish Date:21 March 2018 06:43 PM

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा है कि प्रधानमंत्री पद के लिए उन्हें अयोग्य ठहराने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना करना उनका तथा पीएमएल- एन पार्टी का संवैधानिक अधिकार है। समाचार पत्र द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने यह जानकारी दी है। शरीफ ने जवाबदेही आयोग की सुनवाई के बाद पत्रकारों से कहा कि वह देश की सभी संस्थाओं का सम्मान करते हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन्हें तथा पूरे देश को स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, पहले उन्होंने मेरे खिलाफ काले कानूनों वाले शब्दकोश का इस्तेमाल किया और अब उनकी पूरी पीठ मेरे खिलाफ अवमानना का मामला सुन रही है। शरीफ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों में अब फैसले को लेकर दरार सामने आने लगी है और उन्होंने जो प्रतिक्रिया व्यक्त की है वे सार्वजनिक हो चुकी हैं। न्यायमूर्ति फैयाज का कहना है कि इस केस की शुरुआत पनामागेट की जांच को लेकर की गई है लेकिन उनकी बर्खास्तगी इकमा के आधार पर की गई है। शरीफ ने कहा, इमरान खान ने काफी गंभीर अपराध किया है लेकिन वह अभी भी सादिक और अमीन ही माने जा रहे है। इमरान खान ने अपने अपराध की जिम्मेदारी ले ली है लेकिन अदालत का कहना है कि वह इसे लेकर कतई परेशान नहीं हों। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने जहांगीर तरीन को कार्यालय से बर्खास्त कर दिया है लेकिन उनके खिलाफ कोई संयुक्त जांच टीम का गठन नहीं किया गया है और न ही राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो को उनका मामला सौंपा गया है। इस तरह के दोहरे मानदंड स्वीकार्य नहीं है। शरीफ ने शेख राशिद पर तंज कसते हुए कहा कि जो आदमी हरेक व्यक्ति के भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में बात करता फिर रहा है वह अपनी करोड़ों रुपए की संपत्ति को छिपा रहा है। 
 

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