हंगामे की भेंट चढ़ गया वाईएसआर कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव...

हंगामे की भेंट चढ़ गया वाईएसआर कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव...
Publish Date:16 March 2018 06:18 PM

नई दिल्ली: वाईएसआर कांग्रेस की ओर से लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव हंगामे की भेंट चढ़ गया है. इसका कारण यह है कि शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद भारी हंगामे के बीच संसद सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है. दरअसल, आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने के मामले पर एन चंद्रबाबू नायडू की पार्टी तेलगूदेशम पार्टी की ओर से एनडीए के साथ नाता तोड़ने के बाद सूबे की दूसरी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने बड़ी सियासी चाल चल दी थी. वाईएसआर कांग्रेस की ओर से शुक्रवार को संसद मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव किया था. इसके लिए वाईएसआर कांग्रेस के सांसद वाईवी सुब्बारेड्डी ने लोकसभा महासचिव को नोटिस दिया था. यह बात दीगर है कि शुक्रवार को लोकसभा में भारी हंगामे के बीच सरकार के खिलाफ वाईएसआर कांग्रेस की ओर से पेश किये गये अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा नहीं करायी जा सकी है, लेकिन संभावना यह भी जाहिर की जा रही है कि सोमवार को संसद की कार्यवाही शुरू होने के बाद वाईएसआर कांग्रेस के इस प्रस्ताव पर लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति मिलने के बाद चर्चा करायी जा सकती है. हालांकि, इस बीच यह भी कहा जा रहा है कि सरकार पर दबाव बनाने के लिए विपक्ष की यह एक गोलबंदी भर ही है, क्योंकि सत्ताधारी दल भाजपा संख्याबल के मामले में पहले से ही मजबूत है. लोकसभा में उसके पास खुद के 272 सदस्य हैं. अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद सरकार के खिलाफ अगर जरूरत पड़ने पर वोटिंग होती भी है, तो एनडीए के सहयोगी दलों के मतों से सरकार को फिलहाल कोई नुकसान नहीं होगा.  मोदी सरकार के कार्यकाल में पहली बार इस तरह का प्रस्ताव पेश किया गया है. शुक्रवार को लोकसभा में वाईएसआर कांग्रेस की ओर पेश किये गये अविश्वास प्रस्ताव का टीडीपी के साथ ही विपक्ष की कई पार्टियां समर्थन कर रही है. कांग्रेस की रेणुका चैधरी का कहना है कि आंध्र प्रदेश के लोगों के प्रति हमारा समर्पण जारी है और यह सरकार हमारे उस अधिकार को वापस नहीं ले सकती है. केंद्र सरकार ने खुद का पर्दाफाश कर दिया है और वह अपने गठबंधन तक के साथ नहीं खड़ी है. टीडीपी सासंद जयदेव गल्ला ने कहा कि भाजपा ने अपने डर्टी गेम खेलने शुरू कर दिये हैं. जो उन्होंने तमिलनाडू में किया, कैसे वे छोटे दलों को प्रोत्साहित करने और बड़े दलों के भीतर दरार बनाने की कोशिश की, अब ठीक उसी तरह की रणनीति वह आंध्र प्रधेश में करने की कोशिश कर रहे हैं. हमारे पास सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव है.एमआईएम पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि उनकी पार्टी शुक्रवार को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेगी, क्योंकि मोदी सरकार न केवल राज्य पुनर्गठन अधिनियम को लागू करने में विफल रही है, बल्कि युवाओं को रोजगार देने के वादे को पूरा करने और मुस्लिम महिलाओं और अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अन्याय को रोकने में भी विफल रही है. सीपीआईएम नेता सीताराम येचुरी का कहना है कि सीपीआईएम भाजपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेगी. आंध्र प्रदेश के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने के वादे को पूरा न करना विश्वासघात है. यह संपूर्ण विफलता है और संसदीय जवाबदेही के टाल-मटोल रवैये को हाइलाइट करने की जरूरत है. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम शुरुआत से ही आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का समर्थन कर रहे हैं. हम चाहते हैं कि आंध्र के लोगों को न्याय मिले. जब अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है, तो आपको सरकार की विफलताओं के बारे में बात करनी चाहिए, हम बहुत सारे लोगों से संपर्क कर रहे हैं. अविश्वास प्रस्ताव पर ममता बनर्जी ने कहा कि मैं एनडीए से अलग होने के टीडीपी के फैसले का स्वागत करती हूं. वर्तमान स्थिति में आपदा से देश को बचाने के लिए इस तरह की कार्रवाई होनी चाहिए. मैं विपक्ष की सभी राजनीतिक पार्टियों से अपील करती हूं कि अत्याचार, आर्थिक आपदा और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ एक साथ मिलकर काम करें. आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष एन रघुवीर रेड्डी का कहना है कि कांग्रेस तेलुगू देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस द्वारा केंद्र सरकार के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेगी. एनडीए के साथ चंद्र बाबू नायडू का नाता तोड़ने के मसले पर जदयू नेता केसी त्यागी का कहना है कि बड़े गठबंधन में छोटे-मोटे मतभेद होते रहते हैं. एनडीए को कोई खतरा नहीं है, लेकिन टीडीपी का एनडीए से जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. वहीं, भाजपा के जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा कि हमारा मानना है कि आंध्र प्रदेश में टीडीपी को मुश्किल हो रही है. उन्होंने कहा कि वह 2019 में खुद के लिए हार देख रहे हैं और इसी वजह से अपनी खोई हुई राजनीतिक क्षमता को वापस पाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. आंध्र के मुख्यमंत्री से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि आखिर उन्हें यह महसूस होने में चार साल क्यों लगे कि यह गठबंधन काम नहीं कर रहा है.

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