मनमोहन सिंह उतरे कर्नाटक के चुनावी मैदान में !

मनमोहन सिंह उतरे कर्नाटक के चुनावी मैदान में !
Publish Date:07 May 2018 06:24 PM

नयी दिल्ली। मोदी सरकार पर आर्थिक कुप्रबंधन के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा ने आज कहा कि देश अच्छी स्थिति में है, जीडीपी तेज गति से आगे बढ़ रही है, विदेशी मुद्रा भंडार रिकार्ड स्तर पर है और कांग्रेस को यह सब नहीं दिख रहा है तब यह उसकी बदकिस्मती है। भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने यहां कहा, ‘‘कर्नाटक में कांग्रेस घिर गई है। नरेन्द्र मोदी की सभाओं में आती भीड़ और जनसमर्थन से कांग्रेस घबड़ा गई है। उसके पास कोई मुद्दा नहीं है। पांच साल में सिद्धरमैया सरकार के भ्रष्टाचार से लोगों में व्यापक आक्रोश है।’’ उन्होंने कहा कि जब कर्नाटक में राहुल गांधी और सिद्धरमैया फेल हो गये हैं तब कांग्रेस ने मनमोहन सिंह को उतारा है। ‘‘हमें मनमोहन सिंह के सर्टिफिकेट की कोई जरूरत नहीं है।’’
शाहनवाज ने कहा कि राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद से कांग्रेस पांच चुनाव हारी है और अब राहुल हार का ‘सिक्सर’ लगायेंगे। उन्होंने कहा कि देश अच्छी स्थिति में है, जीडीपी तेज गति से आगे बढ़ रही है, विदेशी मुद्रा भंडार रिकार्ड स्तर पर है और कांग्रेस को यह नहीं दिख रहा है तब यह उसकी बदकिस्मती है। कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सचाई बताने का काम किया है और कभी अपने कार्यालय का दुरूपयोग नहीं किया। शाहनवाज हुसैन ने कहा कि सिद्धरमैया ने समाज को बांटने का काम किया है, हिन्दुओं को बांटने का प्रयास किया है। अब हार दिख रही है तब तरह तरह का दुष्प्रचार करने में लगे हैं। उन्होंने दावा किया कि लोगों को कांग्रेस नीत संप्रग सरकार का कोई काम याद नहीं है बल्कि उन्हें कांग्रेस नीत सरकार के समय का टूजी, कोयला जैसे घोटाले याद हैं। 
उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार पर आर्थिक कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में बैंकिंग धोखाधड़ी काफी बढ़ी है और ऐसे अपराध करने वाले सजा से बच निकलने में कामयाब रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार का आर्थिक कुप्रबंधन बैंकिंग क्षेत्र में आम लोगों के विश्वास को धीरे-धीरे खत्म कर रहा है। सिंह ने कहा, “हमारा देश फिलहाल मुश्किल दौर से गुजर रहा है। हमारे किसान गहरे संकट का सामना कर रहे हैं, आकांक्षाओं से भरे हमारे युवाओं को अवसर नहीं मिल रहे और हमारी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर उसकी सामर्थ्य से कम है।”